ब्यूरो रिपोर्ट - शमीम अहमद सहारनपुर
महिला के साथ हैवानियत की हदें पार करते हुए व्यक्ति ने दुष्कर्म की वारदात को दिया अंजाम, एसएसपी कार्यालय पहुंच महिला ने लगाई न्याय के गुहार।
सहारनपुर में एक बार फिर दुष्कर्म का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां महिला को घर में अकेला पाकर व्यक्ति ने जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया है, पीड़िता के साथ व्यक्ति ने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए महिला के अंगों को भी घायल कर दिया है, एक तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार में महिलाओं के प्रति महिला सशक्तिकरण और अन्य अभियान चलाए जा रहे हैं जिससे महिलाओं को सुरक्षा मिल सके लेकिन वही अभी भी योगी सरकार में कुछ ऐसे लोग हैं जो हैवानियत की हदों को पार करते नजर आ रहे हैं।
आपको बता दें पूरा मामला सहारनपुर थाना बेहट क्षेत्र में दर्ज दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में पीड़िता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से विवेचना किसी अन्य थाने को स्थानांतरित कराने की मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि प्रभावशाली आरोपी को बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में लापरवाही बरती गई, जिसके चलते उसे अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।
पीड़िता द्वारा दिए गए प्रार्थना-पत्र के अनुसार दिनांक 12 नवंबर की रात करीब एक बजे आरोपी ने जबरन उसका मुंह दबाकर दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में थाना बेहट पर मुकदमा दर्ज कराया गया था।
आरोप है कि आरोपी राजनीतिक पहुंच वाला और शातिर किस्म का व्यक्ति है, जिस कारण थाना पुलिस उससे मिली हुई है। इसी वजह से मुकदमा दर्ज होने के बावजूद न तो आरोपी की गिरफ्तारी की गई और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। पीड़िता का यह भी कहना है कि दुष्कर्म के दौरान उसे जो चोटें आई थीं, उनका अब तक चिकित्सकीय परीक्षण नहीं कराया गया, जिससे साक्ष्य प्रभावित हो रहे हैं।
पीड़िता का आरोप है कि वह लगातार विवेचक से संपर्क करने का प्रयास कर रही है, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। इसी दौरान आरोपी ने समय का लाभ उठाते हुए माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश भी प्राप्त कर लिया। पीड़िता का कहना है कि वह इस पूरे घटनाक्रम से गहरे मानसिक सदमे में है और लगातार न्याय न मिलने के कारण उसकी स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।पीड़िता ने अपने प्रार्थना-पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि चोटों से संबंधित फोटो संलग्न किए गए हैं। उसने मांग की है कि निष्पक्ष और ईमानदार जांच सुनिश्चित करने के लिए उक्त मुकदमे की विवेचना थाना बेहट से हटाकर किसी अन्य थाने के स्वतंत्र अधिकारी को सौंपी जाए।


