ब्यूरो रिपोर्ट - शमीम अहमद
सहारनपुर में शोक सभा में उठी नई मिसाल, गांव ने छोड़ा मृत्यु भोज का बोझ
सहारनपुर मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ एक बार फिर आवाज उठी और शोक सभा के बीच ही पूरे गांव ने इसे बंद करने का संकल्प ले लिया। भारतीय शिक्षा चैरिटेबल ट्रस्ट सहारनपुर के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयराम गौतम ने अपने ही परिवार के दुखद अवसर को समाज सुधार की दिशा में बदलते हुए गांववासियों को नई राह दिखाई।
18 मार्च को ग्राम सरकड़ी खुमार में आयोजित शोक सभा एवं रस्म पगड़ी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इससे पहले 16 मार्च को जयराम गौतम के बड़े भाई मांगेराम की पत्नी वाती देवी का हृदयघात से निधन हो गया था। दुख के इस माहौल में जब लोग अंतिम संस्कार की परंपराओं के तहत जुटे थे, तभी जयराम गौतम ने समाज में फैली मृत्यु भोज की परंपरा पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मृत्यु भोज एक ऐसी कुरीति है, जो दुख की घड़ी में भी परिवार पर आर्थिक बोझ डालती है। कई गरीब परिवार सामाजिक दबाव में आकर कर्ज तक लेने को मजबूर हो जाते हैं, जो लंबे समय तक उनकी जिंदगी को प्रभावित करता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि इस परंपरा को खत्म कर समाज को एक सकारात्मक दिशा दी जाए।
जयराम गौतम की अपील का असर भी देखने को मिला। कार्यक्रम में मौजूद सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में मृत्यु भोज बंद करने की प्रतिज्ञा ली और भविष्य में इसे न करने का संकल्प जताया। इस दौरान कई बुजुर्गों और युवाओं ने भी अपने विचार रखे और इस पहल को समाज के लिए जरूरी बताया।
गौरतलब है कि जयराम गौतम इससे पहले भी कई गांवों में इस मुहिम को आगे बढ़ा चुके हैं और लोगों को मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूक कर चुके हैं। अब सरकड़ी खुमार गांव में उठी यह पहल क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।
दुख के बीच लिया गया यह संकल्प न केवल एक परिवार का निर्णय है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि परंपराएं वही टिकती हैं, जो समाज को आगे बढ़ाएं, न कि बोझ बनें।


